मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। इसी बीच चीन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल और डीजल के एक्सपोर्ट पर अस्थायी रोक लगाने का निर्देश दिया है। इस फैसले ने दुनिया भर के तेल बाजार और खासकर भारत जैसे बड़े आयातक देशों में चिंता बढ़ा दी है।
दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिससे कई देश अपने घरेलू ईंधन भंडार को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं।
नीचे समझिए कि चीन ने ऐसा फैसला क्यों लिया, इसका दुनिया और भारत पर क्या असर पड़ सकता है और सरकारें इस संकट से कैसे निपटने की तैयारी कर रही हैं।
चीन ने पेट्रोल-डीजल एक्सपोर्ट पर क्यों लगाई रोक?
रिपोर्ट्स के अनुसार चीन सरकार ने देश की बड़ी तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे फिलहाल पेट्रोल, डीजल और अन्य रिफाइंड फ्यूल का निर्यात रोक दें। इसका मुख्य कारण वैश्विक तेल सप्लाई में अचानक आई कमी है।
इस फैसले के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं:
1. मध्य-पूर्व युद्ध से तेल सप्लाई में भारी गिरावट
ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति में बड़ा व्यवधान आया है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के मुताबिक वैश्विक तेल आपूर्ति में करीब 8 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक की कमी आने का खतरा है।
2. घरेलू ईंधन संकट से बचाव
चीन दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है। ऐसे में सरकार पहले अपने देश की जरूरत पूरी करना चाहती है ताकि वहां पेट्रोल-डीजल की कमी न हो।
3. तेल की कीमतों में तेज उछाल
युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और कई जगह 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी हैं।
4. रिफाइनरियों को उत्पादन कम करने का निर्देश
कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि चीन की बड़ी कंपनी Sinopec को भी उत्पादन घटाने और घरेलू ईंधन आपूर्ति को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या भारत में बढ़ सकती है पेट्रोल-डीजल की कीमत?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और अपनी जरूरत का लगभग 88-90% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है।
ऐसे में अगर वैश्विक सप्लाई कम होती है तो भारत पर इसका असर पड़ सकता है।
संभावित असर:
- कच्चे तेल की कीमत बढ़ सकती है
- पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं
- महंगाई बढ़ने का खतरा
- सरकार का आयात बिल बढ़ सकता है
हालांकि फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदने की कोशिश कर रही हैं ताकि देश में सप्लाई बनी रहे।
भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
मध्य-पूर्व का Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। भारत के करीब आधे से ज्यादा तेल आयात इसी रास्ते से आते हैं।
यदि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो भारत सहित कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
PM Modi सरकार क्या कर रही है?
भारत सरकार ने संभावित संकट से निपटने के लिए कई कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
- वैकल्पिक देशों से तेल खरीदने की तैयारी
- रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश
- रणनीतिक तेल भंडार की निगरानी
- महंगाई पर नियंत्रण की योजना
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।
क्या आने वाले समय में बढ़ेगा तेल संकट?
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर मध्य-पूर्व में तनाव जल्दी खत्म नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
इसके संभावित परिणाम:
- दुनिया भर में महंगाई
- ट्रांसपोर्ट और एयरलाइन किराए बढ़ना
- ऊर्जा संकट
- आर्थिक मंदी का खतरा
निष्कर्ष:
ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। चीन का पेट्रोल-डीजल एक्सपोर्ट रोकना इसी संकट का हिस्सा है ताकि वह अपने देश में ईंधन की कमी से बच सके। हालांकि भारत फिलहाल वैकल्पिक सप्लाई के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अगर युद्ध लंबा चला तो इसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है।